Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Astha Trivedi

Abstract


2  

Astha Trivedi

Abstract


ज़िन्दगी की राह

ज़िन्दगी की राह

1 min 418 1 min 418

जिन्दगी की

अनजान सुनसान राहों में

मिल जाते हैं साथी कई।


कुछ कदम

दो कदम साथ चलकर

मोड़ आने पर मुड़ जाते हैं कहीं।


फिर कभी यादों में

तो कभी बातों में

झलक जाते है कभी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Astha Trivedi

Similar hindi poem from Abstract