STORYMIRROR

Mahima Gantayat

Abstract

3  

Mahima Gantayat

Abstract

काश! हम कभी मिले ही ना होते

काश! हम कभी मिले ही ना होते

1 min
245

हम कभी मिले ही ना होते तो कितना अच्छा होता।


हम कभी संग बैठ कर वो किताब पढ़े ना होते तो कितना अच्छा होता।


 काश! उस रात तुझसे बात ही ना किया होता तो आज जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा होता।


 तेरी उस एक मुस्कुराहट को देखने के लिए अपनों से वक्त निकला बस उस एक गलती की सजा ने आज मुझे अकेला कर डाला ।


 काश! उस  दिन जल्दी सो जाती न देर रात तक जागकर अपने दिल की बात कहीं होती ।


 कश आज हम पहले जैसे ही बात करते तू मेरे पास  होता है और हम संग बैठ कर फिर से वही किताब पढ़ते ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract