कागज का दर्द
कागज का दर्द
लोगों के लिए वो तब तक
ही मायने रखता है,
जब तक वो उनके
काम आता है।
जैसे ही उनका काम
निकल जाता है,
कल तक का काम का कागज़
आज रद्दी बन जाता है।
कागज़ का दर्द
कागज ही जानता है !
कभी प्यार में दिया हूँ
प्रेम पत्र बनकर
उनके सीने से लग जाता है।
कभी प्यार में चोट खाने पर
टुकड़े होकर जमीन पर
बिखर जाता है।
कागज़ का दर्द
कागज़ ही जानता है !
