जश्न
जश्न
नया 'बरस' बारम्बार
हमारे-तुम्हारे द्वारे है, खड़ा
स्वागत तो बनता है,,
नया “उम्मीद” आसरा है, लाता I
पिछला कैसा समय , गुजरा?
आत्मा मंथन का समय है, आया
क्योंकि नए को है , संवारना
जरूरी है बहुत,इससे भी हो अच्छा!
समझदार ने अणु , परमाणु बारे में
सब को समझा, जीना आसान किया
कुछ ने उससे आगे बढ़कर
परमाणु बम बनाया,,,
इज्जतदारों ने रिश्तों की गरिमा
बनाई, समझाई,
बहुतसों ने इस वर्ष भी रिश्तों की
धज्जियां उड़ाई,,,,,
वैज्ञानिकों ने इंटरनेट से द्वार नए खोले
अब तो 'कल्पना' भी ये करता,,
घर से बाजार सब को जरूरत
कुछ कुटिल लोगों ने आगे बढ़कर,,
फिशिंग, हैकिंग,स्पैम ईमेल, रैनसमवेयर
से अपराध पर अपनी कविता बना डाली
कितने ही अनजान 'हीरो' उभरे,,,
हर तरफ हर क्षेत्र में,उम्मीद जगाईI
अकस्मात जीवन को खत्म किया
कारण सब के अपने अपने ,,,,
वो सब्र वो समझदारी ना रही ?
परहित, बड़ों का सर पर हाथ
अब लगती , दूर की बात,,,
कमी को अभी से पाटना होगा
खुश हो व रहना सीखना होगा I
मजदूर,किसान,सैनिक सी आदत
सड़क,खेत व देश सरहदों पर
ईमान,से काम को सदियों से,,
मेहनत व शोर्य,से दिशा दिखाताI
हमारे नये सालों को खुशहाल
है, बनाता आया ,उनको सलाम
कोविड को ज्ञान-विज्ञान,सहयोग से
अलविदा परास्त किया जा रहा ,,
लालच ने इसे भी अवसर बना लिया
इलाज सब का हो रहा ,,,,,
लालची,अधर्मी,कुकर्मी सब का
बेल से जेल से ,अपयश से
नया साल का जश्न मना, सब
ठीक रहा हो ,, आगे भी !
