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Sugan Godha

Abstract

4.9  

Sugan Godha

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ज़रा रुकी थी मैं

ज़रा रुकी थी मैं

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पुरानी तस्वीरों को छोड़, 

 आगे बढ़ी थी मैं !

यादों की स्मृतियों में खो ,

ज़रा रुकी थी मैं !!

अनजान रहो पर चली थी ,

उम्मीदो की गठरी बाँध !

मंज़िल तक पहुंचने से पहले ,

ज़रा रुकी थी मैं !!

रोक ले दूर जाने से मुझे तू, 

थाम कर रख ले पास !

दूर नहीं जाना चाहती थी ,

तभी ज़रा रुकी थी मैं !!

आँखों में विश्वास था मेरे ,

यूँ ही न जाने देगा मुझे !

विस्वास के लिए ही तो ,

 ज़रा रुकी थी मैं !!

तूने ध्यान कहां दिया था ,

आँसू पलकों के पीछे थे !

गहरी साँस भरकर के, 

ज़रा रुकी थी मैं !!



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