STORYMIRROR

mohammad imran

Abstract

4  

mohammad imran

Abstract

जोशीमठ

जोशीमठ

1 min
379

झरते आंसुओ के कतार में

पहाड़ों में बढ़ते दरार देखो

सब लूट जाएगा जमीदोज होगा

सदमे में पड़े परिवार देखो 

कैसी थी विकाश नीतियां हाकिम की

सब रो रहे जारो केतार देखो 


बीत गई जिंदगी एक एक ईट जोड़ते

अब आसरा नहीं तो हकीमों के विचार देखो

नियति तूने किया या करतूत किसी और का है

आंखो के सामने टूटता घर वार देखो 


या मालिक जग के रखवाले 

दुआ सुनले सब बिखरने को त्यार देखो

हमारे मुस्तकबिल को यू ना तोड़ 

इसके सिवा अपना नही कुछ यार देखो


रोक ले अपने कहर को वक्त रहते

हमे बक्स दे हाथ जोड़े तयार देखो

सुना है तू बदल देता है पल में सब 

हे ईश्वर जोशीमठ का कोई उपचार देखो।

आइए हम सब मिलकर ईश्वर से जोशीमठ के लिए दुआ करे


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract