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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Romance

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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Romance

जमाना कविताओं का

जमाना कविताओं का

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मैं जन्मी तो खतों के ज़माने में 

मगर मुझे मुहब्बत हुई 

तब तक फोन का जमाना आ गया 

इसलिए मैंने नहीं लिखे खत 


जो कहा सीधे कहा 

जो सुना सीधे सुना 

लेकिन लिखने की बैचेनी हमेशा रही 

बहुत कुछ था मन की परतों में 

जो मैं तुमसे कभी कह ही नहीं पाई 


कुछ बातें कभी कही नहीं जानती 

हां ! लिखी जरूर जाती हैं 

मैं भी लिखना चाहती थी 

मन की परतों को खोलकर 

मगर वो जमाना खत का नहीं था 

सो मैंने लिखना शुरू किया कविताएँ


जमाना कविताओं का था 

जमाना कविताओं का हमेशा रहेगा।


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