STORYMIRROR

Miss Komal Sanjay Sawalakhe

Abstract

3  

Miss Komal Sanjay Sawalakhe

Abstract

जितना जरूरी है

जितना जरूरी है

1 min
282

कुछ सपने है जो

सोने नहीं देते

कुछ अपने है

जो रोने नहीं देते


आँखें गर लग जाये

और मेरा सपना टूट जाये

इस डर से कई

रातें नींद लगती नहीं


खोजना चाहती हूँ

करोड़ों की भीड़ में

मैं अपने आप को कही

मंज़िल है धुंधली


पर हौसले बुलंद है

रास्ते नहीं आसान

पर जीतना जरूरी है

सारी अधूरी बातों में

बस यही बात पूरी है

जीतना बहुत जरूरी हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract