Rooh Lost_Soul
Romance
कुछ सोचकर हम चुप रहे
पर अब नहीं,
ज़िन्दगी बिन तेरे भी
शायद इतनी बुरी नहीं।
रूह को मेरी दिए,
ना जाने कितने ज़ख्म,
फिर भी चुप रहे, हाँ मगर
रूह की रूह को हुई पीर,
था ये गंवारा नहीं।
कुछ सोचकर थे,
हम चुप रहे
पर अब नहींं,
हाँ अब नहींं।
मेंहदी
चाहती हूँ...
एहसास
मोहब्बत - तड़प...
मेरा लिखना
कविता में कहा...
वो तुमसे मिलन...
प्यार नहीं तु...
वो शख्स
लम्हे
जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना। जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना।
इश्क़ में तेरे हद से गुज़र जाऊँगी या या बिखर जाऊँगी या संवर जाऊँगी...! इश्क़ में तेरे हद से गुज़र जाऊँगी या या बिखर जाऊँगी या संवर जाऊँगी...!
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो। तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो।
एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी। एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी।
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया ! दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया !
राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए। राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए।
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।। है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।।
वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं। वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं।
जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे। जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे।
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ जाओ। आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ ज...
पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे। पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे।
जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं बेचैनी सी हो जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं...
इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन ! इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन !
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।