ज़िंदगी फिर भी तुझसे प्यार है
ज़िंदगी फिर भी तुझसे प्यार है
ऐ ज़िन्दगी कहते हैं, बड़ी ही अजीब तेरी दास्तान है,
जीता तुझे वही जी भर जिसके होठों पर मुस्कान है,
अनमोल है तू बड़ी मिलती है सबको, बस एक बार,
जो तेरी अहमियत नहीं समझता, वो बड़ा नादान है।
भटका देती है कभी मार्ग से,ठोकरें भी देती हजार है,
फिर सही राह तू ही दिखाती, इतना तुझपे ऐतबार है,
उलझा देती हर मोड़ पर, किसी न किसी उलझन में,
तू कुछ भी कर ले ऐ ज़िंदगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
कभी दुःख देती इतना, जीवन हो जाता जार-जार है,
कभी तू हमें बिखेरने को, तूफ़ानों को करती तैयार है,
हर मोड़ पे, जाने कितने रूप, कितने रंग बदलती तू,
समझ ना आए तू ऐ ज़िन्दगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
कभी प्यार से गले लगाती, कभी पड़ती तेरी मार है,
कभी रुई सी लगती कोमल तू, तो कभी तेज़ धार है,
कितनी वेदनाएं, कितने ही ज़ख्म, तुझमें हैं समाहित,
जीना पड़ता इनमें ऐ ज़िंदगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
न चाहते हुए भी कभी कभी, नफ़रत बनता आधार है,
टेढ़े मेढ़े अजनबी राहों पर आंँखों में पलता इंतजार है,
कभी बाढ़ में बहाती,कभी कड़ाके की ठंड से सताती,
कितना भी रुला ले ऐ ज़िंदगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
कभी वक़्त से करके सांठगांठ, ज़ख्म देती सौ बार है,
तो कभी कामयाब होने के, तू मौके भी देती हज़ार है,
तेरी चिलचिलाती हुई धूप, कभी हिम्मत भी देती तोड़,
कितना भी सता तू ऐ ज़िंदगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
कभी दिल से बंधे रिश्तो के भी, तू तोड़ देती, तार है,
तेरे पैदा किए हुए हालातों से करना पड़ता इकरार है,
चुनौतियांँ तेरी ऐसी ऐसी, जो आंँखों में आंँसू ले आए,
तेरी हर तपन सहते ऐ ज़िंदगी फिर भी तुझसे प्यार है।
कभी बेगुनाह को भी, बना कर रख देती गुनहगार है,
कितनी बार भूखे पेट सुलाया है, दर्द दिया बेशुमार है,
हर एक को सहना ही पड़ता है, तेरे दिए ग़म को यहांँ,
जंग है तू हर लम्हा ऐ ज़िंदगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
पल में आशा की रोशनी, पल में दिखाती अंधकार है,
जब जब यकीन हुआ तुझ पर, तू धोखे देती हजार है,
जवाब मांगो तुझसे कभी, तो बस करती है सवाल तू,
कहते तुझे बेवफा ऐ ज़िन्दगी, फिर भी तुझसे प्यार है।
जब- जब भी, जीने के लिए, खुद को किया तैयार है,
बदल कर तूने परिस्थितियों को हर बार किया वार है,
बनती तू कभी-कभी ऐसी पहेली, सुलझाए न सुलझे,
इतनी अकड़ तुझमें ऐ ज़िंदगी फिर भी तुझसे प्यार है।
