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sukhwinder Singh

Inspirational

3  

sukhwinder Singh

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​ज़िंदगी का सफर

​ज़िंदगी का सफर

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खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उठा करते हैं, हमें क्या खाक रोकेंगे ये ज़माने वाले, हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं। ​2. हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िंदगी, बस चलते रहिए जनाब। ​3. समंदर की फितरत भी अजीब है, जहाज डुबो देता है और लाश को किनारे लगा देता है। ​4. कामयाबी हाथों की लकीरों में नहीं, माथे के पसीने में होती है। ​5. मंजिलें उन्हीं के कदम चूमती हैं, जो हार मानकर भी मुस्कुराना जानते हैं। ​नेक्स्ट?


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