ज़िंदगी का सफर
ज़िंदगी का सफर
खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उठा करते हैं, हमें क्या खाक रोकेंगे ये ज़माने वाले, हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं। 2. हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िंदगी, बस चलते रहिए जनाब। 3. समंदर की फितरत भी अजीब है, जहाज डुबो देता है और लाश को किनारे लगा देता है। 4. कामयाबी हाथों की लकीरों में नहीं, माथे के पसीने में होती है। 5. मंजिलें उन्हीं के कदम चूमती हैं, जो हार मानकर भी मुस्कुराना जानते हैं। नेक्स्ट?
