शीर्षक: नन्हा कदम
शीर्षक: नन्हा कदम
छोटा सा एक बीज देखो, धरती में सो जाता है,
मिट्टी, पानी खा-पीकर, वह ऊँचा पेड़ बन जाता है।
नन्हीं चींटी को देखो तुम, सौ बार वह गिरती है,
पर दाना लेकर चढ़ने से, वह कभी नहीं डरती है।
मत सोचो तुम छोटे हो, मत समझो कि कमज़ोर हो,
तुम्हारे भीतर छुपा हुआ, सफलता का एक शोर है।
हौसलों के पंख लगाओ, छू लो तुम आसमान को,
अपनी मेहनत से तुम बदलो, इस सारे जहान को।
रुकना नहीं, थकना नहीं, बस आगे बढ़ते जाना है,
दुनिया के इस नक्शे पर, अपना नाम बनाना
