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sukhwinder Singh

Children Stories

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sukhwinder Singh

Children Stories

शीर्षक: लवी और नन्ही चहचहाहट

शीर्षक: लवी और नन्ही चहचहाहट

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शीर्षक: लवी और नन्ही चहचहाहट ​शायरी: सुबह की धूप में जब परिंदे घर को आते हैं, लवी की आँखों में तब कुछ सपने जाग जाते हैं। वो बोलती नहीं, बस नन्ही आवाज़ें निकालती है, जैसे कुदरत के ही रंगों में खुद को ढालती है। ​कविता: ​सुबह की पहली किरण जब, आँगन में मुस्काती है, नन्ही चिड़ियों की टोली, दाना चुगने आती है। खिड़की के पीछे छिपकर, लवी उन्हें निहारती, अपनी भूरी आँखों से, चुपके-चुपके ताड़ती। ​वो धीरे से गले से, एक सुरीली तान निकालती, जैसे चिड़ियों की ही भाषा, वो खुद है पालती। 'चूँ-चूँ' की वो दबी आवाज़, बड़ी ही प्यारी लगती, मानो नन्हे पंखों संग, उड़ने की ज़िद है जगती। ​न वो झपट्टा मारती, न वो उन्हें डराती, बस अपनी मीठी बोली में, उनसे हाथ मिलाती। लवी की वो भोली बातें, और वो कमज़ोर सी लय, भर देती है खुशियों से, घर का हर एक समय। ​शायरी: इंसान तो क्या, यहाँ बेजुबान भी बातें करते हैं, मोहब्बत की ज़ुबान में, वो जज्बात पेश करते हैं।


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