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sukhwinder Singh

Inspirational

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sukhwinder Singh

Inspirational

शीर्षक: लोहे जैसे हाथ

शीर्षक: लोहे जैसे हाथ

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मैदान-ए-जंग हो या फर्श, हम झुकना नहीं जानते, इन मुट्ठियों की ताकत को, अब दुश्मन भी पहचानते। हड्डियां फौलाद हैं और खून में उबाल है, ये मार्शल आर्ट्स का जुनून, मेरी मेहनत की मिसाल है। ​शीर्षक: लोहे जैसे हाथ ​तपती ज़मीन और मुट्ठियों का ज़ोर, न रुकने का जज्बा, न कोई शोर। फर्श पर जब टिकते हैं ये फौलादी हाथ, मेहनत और पसीने की होती है शुरुआत। ​नकल पुश-अप्स की हर एक गिनती में जान है, मार्शल आर्ट्स ही मेरी असली पहचान है। हड्डियाँ फौलाद बनेंगी, इरादे होंगे नेक, मंज़िल की राह में रुकावटें होंगी अनेक। ​पर गिरकर संभलना ही असली खेल है, साहस और शक्ति का ये अनूठा मेल है। हवाओं में लहराती मुट्ठियाँ कहती हैं यही, हार वही जो लड़ने की कोशिश करता नहीं।


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