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Bhavna Thaker

Abstract

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Bhavna Thaker

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ज़िंदगी जश्न है

ज़िंदगी जश्न है

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ज़िंदगी की रानाइयां देखी है कभी ? 

ज़िंदगी शूल या नश्तर सी नहीं 

अगरबत्ती सी पाक सुगंधित

मघमघती बयार है ज़िंदगी.! 


वक्त की धार पर बहती हवाओं में इत्र सी घुलती

फूलों में खुशबू सी बसती

आसमान पर बादल सी झूमती

रात में चाँदनी बिखेरती 

मौसम में बरखा सी बरसती है ज़िंदगी.!


अमृता इमरोज़ की रचनाओं में मुस्कुराती या

गुलज़ार की नज़्मों से झाँकती हर सूर छेड़ जाती है, 

छूकर देखो प्रीत की डोर से बंधे दो दिलों की

धड़कन में संगीत सी बजती है ज़िंदगी.!


"ना बंज़र नहीं ज़िंदगी" 

लहलहाती हरियाली ओर दुआओं की असर सी

या हंसती गुनगुनाती गज़ल सी है ज़िंदगी.! 

वो देखो समुन्दर की सतह पर कश्ती से आँख लड़ाती लहरों को, 

या देखो पर्वत की चोटी से खेलते बादलों के झुरमुट को,

झील के शांत पानी में तैरते हंसो की आँखों की पुतलियों में 

झिलमिलाती है ज़िंदगी.! 


भोर की पहली रश्मियों से खेलते

विंडचाइम की घंटियों में निनाद सी बजती है 

तो कभी केसरिया ढ़लती शाम को अलविदा कहते

डूबते सूरज के भाल पर सुशोभित है ज़िंदगी.! 


काटो तो अग्नि पथ सी है ज़िंदगी 

जिओ तो जश्न सी है ज़िंदगी 

ज़िंदगी को दावत तो दो 

हज़ारों खुशियाँ दामन में समेटे 

घर की चौखट महकाती है ज़िंदगी।


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