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Mohammed Etesam

Tragedy

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Mohammed Etesam

Tragedy

जिंदगी ही जख्म है

जिंदगी ही जख्म है

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मेरी शायरी उसी से शुरु थी,

और उसी पर खत्म है!


अब भावनाएं मर चुकी,

संवेदना खत्म है!


दर्द से मैं क्या ङरूं,

जिंदगी ही जख्म है!


अब किसी से मैं क्या कहूं,

जिंदगी ही जख्म है!!


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