Mohammed Etesam
Tragedy
मेरी शायरी उसी से शुरु थी,
और उसी पर खत्म है!
अब भावनाएं मर चुकी,
संवेदना खत्म है!
दर्द से मैं क्या ङरूं,
जिंदगी ही जख्म है!
अब किसी से मैं क्या कहूं,
जिंदगी ही जख्म है!!
शायर
जिंदगी ही जख्...
सख्त लौंडा
जिंदगी का कार...
वक्त आने में ...
एक गजल तेरे न...
मेरे यार दौर ...
कंपकपाते शरीर की सिहरन से अलाव की लकड़ियां क्षुब्ध हो गईं। कंपकपाते शरीर की सिहरन से अलाव की लकड़ियां क्षुब्ध हो गईं।
चिराग कैसी जिद भरी ये बात करते हैं चलो हम आज तूफानों से बात करते हैं। चिराग कैसी जिद भरी ये बात करते हैं चलो हम आज तूफानों से बात करते हैं।
बेटी की विदाई के बाद खोली नहीं मैंने उसकी अलमारी। बेटी की विदाई के बाद खोली नहीं मैंने उसकी अलमारी।
मुहब्बतों की ये महफिल है ना समझ सुन ले। यहां पे अक्ल नहीं दिल लगाए जाते हैं।। मुहब्बतों की ये महफिल है ना समझ सुन ले। यहां पे अक्ल नहीं दिल लगाए जाते हैं।।
अपने मतलब से मतलब रखते हैं ये दुनियावाले। अपने मतलब से मतलब रखते हैं ये दुनियावाले।
तुम्हारे काम आएगी तो..रखलो बेशक मेरे खून से तुम्हारी शराब आ जाएगी। तुम्हारे काम आएगी तो..रखलो बेशक मेरे खून से तुम्हारी शराब आ जाएगी।
मान लूंगी आज भी तेरी हर बात.. चुपचाप ..सहमती से। मान लूंगी आज भी तेरी हर बात.. चुपचाप ..सहमती से।
उसका दूसरा सिरा थोड़ा , अधखुला सा मरोड़ जाता है ! उसका दूसरा सिरा थोड़ा , अधखुला सा मरोड़ जाता है !
आज खाली सा लगता है अपने घर का बगीचा, कल चिड़िया चहकती थी। आज खाली सा लगता है अपने घर का बगीचा, कल चिड़िया चहकती थी।
मैंने सांसों में बसाया उन्हें खुशबू की तरह। मैंने सांसों में बसाया उन्हें खुशबू की तरह।
हम रुक कर भी रुक जायेंगे हम झुकते नहीं, झुकाते है हम रुक कर भी रुक जायेंगे हम झुकते नहीं, झुकाते है
बूढ़ा बूढ़ी कह रहे, कितना बुरा संसार, इंसानों को भूलकर, धन से करते प्यार। बूढ़ा बूढ़ी कह रहे, कितना बुरा संसार, इंसानों को भूलकर, धन से करते प्यार।
लोग साथ तो रहते है, पर बनकर अनजान लोग अंधेरे से नहीं, रोशनी से हुए परेशान लोग साथ तो रहते है, पर बनकर अनजान लोग अंधेरे से नहीं, रोशनी से हुए परेशान
कब तक यूं ही दूर रहोगे, कब तक हमसे नहीं बोलोगे। कब तक यूं ही दूर रहोगे, कब तक हमसे नहीं बोलोगे।
पानी से प्यास तो बुझती है, मगर... लालसा की अग्नि जब तन-मन को जलाती है। पानी से प्यास तो बुझती है, मगर... लालसा की अग्नि जब तन-मन को जलात...
एक घर पति का एक पिता का मेरा घर कौन सा बताए कोई मुझे। एक घर पति का एक पिता का मेरा घर कौन सा बताए कोई मुझे।
ठहराव आकर्षण , लोभ में बाँध देगा । ठहराव आकर्षण , लोभ में बाँध देगा ।
नियत आगमन भोर का यद्यपि, प्रतीक्षा में लौह भी जंग हुए, नियत आगमन भोर का यद्यपि, प्रतीक्षा में लौह भी जंग हुए,
न मधुर गायन है मेरी न राग का मैं ज्ञानी हूँ! किसी तरह चल रहा है मैं तो बड़ा अज्ञान हूं। न मधुर गायन है मेरी न राग का मैं ज्ञानी हूँ! किसी तरह चल रहा है मैं ...
रोज के युद्ध खिंचते युद्ध कभी ना ख़त्म होने वाले युद्ध। रोज के युद्ध खिंचते युद्ध कभी ना ख़त्म होने वाले युद्ध।