ज़िंदा रहने की शर्तें
ज़िंदा रहने की शर्तें
मुझे नहीं पता,
ज़िंदा रहने की शर्तें क्या हैं,
ना ही मालूम है
ज़िंदगी की एवरेज अवधि।
पर इतना जानता हूँ,
कि सांसों की गिनती
ज़िंदगी की काउंटिंग नहीं।
ज़िंदा रहना है,
तो ज़िंदा रखो,
अपने अंदर की आग,
अपने सपनों की उड़ान,
उस दिल को, जो धड़कता है
खुद के लिए
और औरों के लिए भी।
ज़िंदा रखो
उस उम्मीद को,
जो अंधेरे में
चिराग बनकर जलती है।
ज़िंदा रखो
उस हंसी को,
जो दूसरों के होंठों पर
खिलखिलाहट लाती है।
मरने से पहले
ज़िंदा कर दो उन लम्हों को,
जो अमर बन जाएं।
दे जाओ वो निशानियां,
जो समय की धूल में
कभी खो न पाएं।
ज़िंदा रहना
सिर्फ जीना नहीं,
ये एहसास है,
कि तुम्हारे होने से
दुनिया थोड़ी तो बेहतर हुई।
तो जियो,
और ज़िंदा रखो
खुद को भी
औरों को भी।
चाहे मर क्यों ना जाओ,
ज़िंदगी को ज़िंदा रखो।
