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Satyam Kumar Srivastava

Inspirational


5.0  

Satyam Kumar Srivastava

Inspirational


आगे-आगे बढ़ते जाए

आगे-आगे बढ़ते जाए

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आगे-आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए

नया सफ़र है नई डगर है, सब कुछ नया - नया है

कर्तव्य हमारा इस पथ पर कदम - कदम चलना है

विचलित न हो अपने पथ से चाहे जो तुफान आ जाये

आगे - आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए



पथ रौशन की राह चुनी है करके इसे दिखाना है,

मान देश का हम सबको मिलकर आगे बढ़ाना है

फूल नही अंगारों पर चलना पड़ा तो क्या हुआ,

कम देश की उन्नति का मिलकर सफल बना जाए

आगे - आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए।


एक बार जो प्रण लिया फिर उससे नही मुकरते हैं,

देश के खातिर अपने प्राणों का भी सौदा करते हैं

इस सौदे से देश की यदि उन्नति हो जाए

प्राणों का ये सौदा हम सबको भा जाए

आगे - आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए।



अपने देश के वीर शहीद इस पथ पर ही तो चलते थे,

शहीद हो गये वीर हमारे, अमर हो गये दुनिया में

देश नाम रौशन हम कर जाए ऐसा कुछ दिखला जाए

आगे - आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए।


मन सच्चा हो राह नेक हो तो कैसा डर है,

पग-पग पर फूल और काँटे भी तो मिलते हैं,

इससे डर के पीछे न हो तो कुछ बात बन जाये

आगे-आगे बढ़ते जाए पथ रौशन हम करते जाए।


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