STORYMIRROR

Satyam Kumar Srivastava

Classics

3  

Satyam Kumar Srivastava

Classics

महाकाल की उपासना

महाकाल की उपासना

1 min
674

उपासना हूँ उपासना मैं

हूँ उपासक उस महाकाल शिव जी की मैं

इसीलिए हूँ उपासना मैं

अवघड दानी नाथ ज्ञानी है त्रिकाल दर्शी रुद्र रूप

है काल भी भयभीत जिससे महाकाल मृत्युंजय वाणी

अटल सत्य निराकार स्वरूप नव चेतना सृष्टि चरा चर

है तेज जिसके मुख मंडल पर हे नाथ स्वामी मम सुप्रभातम् 

है त्रिशूलधारी त्रिनेत्र वाला परमज्ञानी वो सन्यासी

मस्तक की शोभा बढ़ाता चंद्र और जटा में जिसके चंचल गंगा

है नीलकंठ वो शम्भू अविनाशी

रम गयी हूं उनके दिव्य रूप में बन गयी उपासक उसकी मैं

उपासना हूँ उपासना मैं


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics