जिंदा मुस्कान
जिंदा मुस्कान
जिसके चेहरे पर होती है,जिंदा मुस्कान
वो व्यक्ति हर गम से रहता है,अनजान
चाहे,यह ज़माना कितने ही हो,शैतान
उसके लबो पर रहती है,नित मुस्कान
पर आजकल खत्म हुई,जिंदा,मुस्कान
बनावटी हंसी हो रही,प्रतिदिन जवान
जिधर देखो,उधर ही दिखावटी इंसान
मर चुकी है,आजकल सच्ची मुस्कान
मासूमियत का टूट चुका है,मकान
कृत्रिमता को लोग बता रहे है,महान
आज सच्चाई पहुंच चुकी है,श्मशान
बेईमानी की बोल रहे है,सब जुबान
सच्ची हंसी का भी अलग होता,गुमान
सच्ची मुस्कान ही जिंदा रखती है,ईमान
सच्ची मुस्कान में आते,लाख इम्तिहान
पर यही पहुँचाती,हमे अंत मे आसमान
यूं चमकीले कई पत्थर है,इस जहान
पर हीरे की अलग ही होती है,पहचान
वैसे बनावटी हंसी के यहां कई,इंसान
मिटाती उदासी केवल,सच्ची मुस्कान
हर गम का यहां पर एक ही,रामबाण
अपने लबों पर रखिये,जिंदा मुस्कान
सच्ची हंसी,खुलकर हंसी होती है,सुभान
इसको करिये,शांत होगा,फिर हर तूफान
एकबार रखे,लबो पर जिंदादिल मुस्कान
फिर लगेगा बहुत ही खूबसूरत,यह जहान
जिसके चेहरे पर होती है,जिंदा मुस्कान
वो व्यक्ति हर गम से रहता है,अनजान।
