STORYMIRROR

Sankit Sharma

Inspirational Others

3  

Sankit Sharma

Inspirational Others

जीवन

जीवन

1 min
32

भूस्खलन में गिरती पठारों के जैसे

 ढहे जा रही है समय की पगडंडियां

 कर रही पथ को धुंधला 

आशंका सी ये फैली रेत

 ताजपोशी की प्रतीक्षा में

 न जाने कितने विचार मर जाते है 

जीवन जिजीविषा का नाम है 

अंत से आती रेखा जैसा होता है 

प्रतिबिंब इसका 

और मिटती सी धुंधली रेखाओं

को गाढ़ा कर देना ही होता है

 सफल होना

 जो मिटती नहीं फिर 

टूट जाने के बाद भी 

प्रसंगवश अंत की ओर भागते

जीवन तो सब ही जीते है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational