जीवन साथी
जीवन साथी
दोस्तों से मिलकर जग के जीवन को संवारो
दुविधाओं की जंजीरों को झटपट पार करो
ईर्षा जलन घृणा तीनों के जाल ज़रा तोड़ो
इश्क बढाओ दया दिखाओ दोस्ती संभालो
रंग बिरंगा मेला जीवन,विजयध्वज फहराना
खेतों में, कारखानो में,दफ्तरों के अंदर भी
मंदिर मस्जिद गिरिजा जैसे पुण्य तरंगो में
एकता की भावना से दिल को भरना है ।
गुरुकुल जीवन पूरा करके कृष्ण कहाँ लौटे
द्वारका में राजभोग से जनहित मानते थे
बहुतायत साल बीते, श्याम न भूले कुछ भी
जब सुदामा आए तब गले लगाए उसको ।
सच्चा मित्र वहीं जो अपनी कठिनाई में भी
आँसू पोंछ सारे गम को दूर भगाता है ।
जीवन साथी नव किसलय पर खड़ी हुई बूँदें
उनपर सूर्य किरण बिखराते रोशनी जैसे हैं।
