STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Abstract

4  

सोनी गुप्ता

Abstract

जीवन रक्षक

जीवन रक्षक

1 min
667

दुखी कौन नहीं है इस जग में

लेकिन दुखहर्ता होता एक है I

जो हमारा जीवन रक्षक है

चिकित्सक कहलाता वो नेक है।


अपने दुख को सब रोते हैं

पर इस दुःख को हरता कोई है I

आज देश भर में फैली है महामारी

बेबश और लाचार है दुनिया सारी।


सुख में सब होते साथ हमारे हैं

अपनों के तो सब बन जाते I

दुःख में अपनाता कोई एक है

चिकित्सक कहलाता वो नेक है।


सेवा करना ही है जीवन उसका

उससे बढ़कर जीवन किसका I

लक्ष्य सिर्फ है जीवन रक्षा करना

चिकित्सक कहलाता वो नेक है।


उन से बढ़कर कोई नहीं है

जो सिसकियों की आहों का I

मुस्कानों में कर दे परिवर्तन

चिकित्सक कहलाता वो नेक है।


देते उन्हें हम दिल से धन्यवाद

उनको आशीषों का अर्पण है I

जादू हाथों में, देते जीवन दान है

चिकित्सक कहलाता वो नेक है।


पीड़ित सुखों के क्षण पाता है

सुखमय हो जीवन उनका I

जो हमारा जीवन बचाता है

जीवन रक्षक वह कहलाता है।


बहुत बहुत धन्यवाद देते उनको

धन्य-धन्य हो जीवन उनका

सेवा करता दुःख हरता है

जीवन रक्षक वह कहलाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract