STORYMIRROR

Nutan Garg

Abstract

3  

Nutan Garg

Abstract

जीवन के दो अनमोल रतन

जीवन के दो अनमोल रतन

1 min
250

लिख दिया ग़मों को, 

मैंने एक पत्र में,

मन हल्का कर लिया,

समय के रहते जीवन में।


लिख दिया ख़ुशी के पलों को,

मैंने एक पत्र में,

मन खुश कर लिया,

समय के रहते जीवन में।


दोनों रहते सदा साथ हमेशा,

आते रहते बारी-बारी,

इसी का नाम तो जीवन है,

क्या लिखूँ अब पत्र में आगे ?


ग़म और ख़ुशी हैं,

वो दो अनमोल रतन,

जिनके बिना हमारा जीवन,

बना रहता अधूरा सा।

पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract