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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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जीवन का अनजान सफ़र

जीवन का अनजान सफ़र

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जीवन है एक सफर सुहाना, मंजिल की कर लें पहचान।

भांति-भांति के लोग मिलेंगे, होंगे प्रिय जो थे अनजान।


गम और खुशी धूप छांह से हैं ये,आते जाते सदा रहेंगे।

तेरा स्वर्ण बनेगा कुंदन, जितना दु:ख का ताप सहेंगे।,

दु:ख बेहतर शिक्षक है सुख से,सारे हैं अनुभव ये कहते।

नहीं जरूरी हम गम झेलें, सीखें देख औरौं को सहते।

यत्न करने उनको हरने का, देंगे ये हमको मुस्कान।

जीवन है एक सफर सुहाना..


बांटें सतत् ही खुशियां सबको, दु:ख हरने का करें अभ्यास। 

दूर करें अज्ञान के तम को, क्षमता भर बिखेरें ज्ञान प्रकाश।

मिटेंगे गम और मिलेंगी खुशियां,प्रतिध्वनि का नियम ये खास।

खुद हित इन्हें मिटाएं और जुटाएं, वही बांटोगे होगा जो पास।

विचलित ना हों असफलता से,सतत् लक्ष्य पर धरना ध्यान।

जीवन है एक सफर सुहाना..


विशिष्ट लक्ष्य पूरे करने को ,प्रभु ने भेजा हमें धरा पर।

करें प्रयत्न पूर्ण शक्ति से, जाएंगे हम भवसागर से तर।

आलस और लोभ रोकेंगे, ऐसे दुर्गुणों मत जाना तुम डर।

 पथ है भरा हुआ कांटों से , औरअनजाना है तेरा सफर।

रुकना है मौत के जैसा,बढ़ते रहना है जीवन की पहचान।

जीवन है एक सफर सुहाना..



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