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Saroj Garg

Classics

4  

Saroj Garg

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जीवन चलने का नाम

जीवन चलने का नाम

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जीवन चलने का नाम 

चलते रहो सुबह-शाम।

सूरज की तरह 

रोज निकलना 

रोज ढलना 

कभी न रुकना 

कभी न झुकना

आगे बढना तेरा काम।


जैसे नदियाँ बहती जाती,

अपना रस्ता खुद बनाती।

कभी न रुकती सदा ही चलती। 

जाकर फिर समुद्र में मिलती। 

 बचपन से बुढापे तक 

समय बिताना ही नहीं जिंदगी 

कुछ ऐसा करते चलो कि

 लोग याद करते रहे पूरी जिंदगी 

अपना रस्ता खुद बनाना।


मंजिल खुद ही मिल जायेगी,

इन्सानियत का रास्ता चुनकर।

सबका भला करते जाना,

दुःख दर्द सबका मिटाते जाना।

 अंत समय फिर अच्छा होगा,

जीवन यूँ ही बीत जायेगा।


यही है जीवन चलने का नाम 

चलते रहो सुबह-शाम। 


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