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Sudershan kumar sharma

Abstract Inspirational

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Sudershan kumar sharma

Abstract Inspirational

जिद्द(गजल)

जिद्द(गजल)

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मत कर जिद्द दुनिया को जख्म दिखाने की,

चुभे हैं कितने काँटे राह में सब को बताने की। 


उठाए हैं किसने कितने गम, 

किसी को क्या चिंता, नहीं समझ सका अब तक तू फितरत जमाने की। 


है, शामिल जिनके दिल में शिकवे शिकायतें व रूठना हर पल,

क्यों रखते हो चाहत हर पल उन्हें मनाने की। 


जिन्दा हैं, दुर्योधन, दुशासन, अभी तक हर जगह,

जब तक फिक्र है, शकुनी जैसों को चौपड़ बाजी लगाने की। 


लड़ाई, झगड़ों में, दिखते हैं जो हर पल,

आपको क्यों चिन्ता है उनसे निभाने की। 


न समझ सकते हैं, जो चाहत दिल की सुदर्शन क्या जरूरत है

उनसे रूबरू दिल लगाने की। 


चलता चल तू भी जमाने को देखकर

जरूरत क्या पड़ी तुझे अपना दिल दुखाने की। 


कर ले बन्दगी सुबह शाम उस रब से हे बन्दे, फुर्सत मत रख

किसी से उलझ जाने की। 


रख नियत साफ कर्म ऊँचे हमेशा के लिए तू सुदर्शन

चिन्ता मत कर मीठे फल 

पाने की। 

उलझे रहते हैं महाभारत बना कर हर पल जो,

जरूरत क्या पड़ी उनको रामायण सुनाने की। 



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