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संदीप सिंधवाल

Abstract Classics

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संदीप सिंधवाल

Abstract Classics

झूठा सा

झूठा सा

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आधा जुबां पर सच आधा झूठा सा 

दिल में प्यार, गुस्सा ज्यादा झूठा सा।


मुनाफा की बात नहीं है मोहब्बत में 

प्यार पाकर चैन का घाटा झूठा सा।


दो दिलों का मिलन होता एकांत में

शोर शराबा गाजा बाजा झूठा सा।


राज करना है तो तुझे दिलों में कर

उनकी नजरों में छा जा झूठा सा। 


पूरा कर सके तभी बोल 'सिंधवाल'

वरना ना कर कोई वादा झूठा सा। 


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