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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

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जहाँ नीलकंठ विराजे वहीं धाम

जहाँ नीलकंठ विराजे वहीं धाम

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बदन में मले भभूत,

भोलेनाथ अवधूत !

       भोले शिव महादानी,

       डरते उनसे हैं यमदूत !


 शंकर शिव महाकाल हैं ,

 तीन नेत्र उनके भाल हैं !

             कार्तिकेय गणेश लाल हैं,

             शिवपाठ से मिटते बबाल हैं !

       

काम क्रोध को किया अनंग,

महेश्वर नीलकंठ हैं शुभँग !

       नीलकंठ के स्याह हैं अंग,

        शीश शुभ्र सोहे मुकुट भुजंग !


व्यापक हैं जटाधारी वेद रूप,

समृद्धि व सुख देते हैं अनूप !

           महिमा शिव जी की ऐसी,

           उनकी सेवा करें सुर भूप !


भक्तगण जपते शिव का नाम,

कृपा करें भगवन कृपा निधान !

         अर्धांगिनी गौरा उनके वाम,

          जहाँ शंकर वहीं चारों धाम !



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