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Ruchika Rana

Inspirational


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Ruchika Rana

Inspirational


नई सुबह

नई सुबह

1 min 211 1 min 211


काश कि अंत हो जाए...

इन बिगड़े हालातों का !

मिट जाए निशां...

इन जलते अंगारों का !!


हो जाए उदित...इक नई सुबह 

मेरे चमन में !

हो प्रफुल्लित शांति सुमन...

मेरे, तुम्हारे.. हम सब के मन में !!

वैर-द्वेष भावना का अंत हो जाए,

हम एक थे....

चलो अब फिर से एक हो जाएँ !!!


ऐ इंसान....तू इंसान ही रह,

किसी शातिर का हथियार न बन!

बिछ जाए शतरंज...

पल भर में जिस पर 

भूल कर भी...वो बिसात न बन!!


तमाशबीन हैं वो ,

बस तमाशा देखेंगे!

फूंक कर घर...

हमारे-तुम्हारे 

धुएँ के निशान देखेंगे!!


वक्त है अभी भी...

कि सँभल जाएँ हम!

निकाल कर नफरतों के काँटे...

प्रेम पुष्प खिलाएँ हम!!


मैं या तुम न रहें... 

अब हम बन जाएँ !

मुमकिन है तभी विश्व में....

हम अपना परचम लहराएँ!!!



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