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Anamika Vaish Aina

Inspirational


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Anamika Vaish Aina

Inspirational


जब मंजिल मिल जाती है

जब मंजिल मिल जाती है

1 min 150 1 min 150

कई सत्य उजागर होते हैं

चेहरे कई धुँधलाते हैं

तन्हा सा मन हो जाता है

पर दिल को झूठलाते हैं 


अपने ही द्वेष ईर्ष्या में 

अपनो को ये जलाते हैं

रिश्ते तो रहते है लेकिन 

रिश्तों से प्रेम भुलाते हैं


जब मंजिल मिल जाती है 

वापस मिलते सब रिश्ते 

कल तक जो काला साया 

तब बनते हैं सभी फरिश्ते


मतलब के हैं लोग यहां

मतलब के ही सब रिश्ते हैं

मनोभाव कुटिल रखते हैं

झूठी प्रेम की किश्तें हैं


अंजान किया कु-समय में

घायल किये सब सपने

मंजिल मिलते ही बदले 

शिखरों पर बनते अपने।


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