ग़ज़ल
ग़ज़ल
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जीवन सदा निशा छनती चाँदनी रहे
कोई घुली मिली मृदु सी चाशनी रहे..
हारा हुआ नहीं मन लोगों मिरा सुनो
आवाज़ से डरा कब तक आदमी रहे..
कमज़ोर हूँ नहीं अब मैंने बता दिया
जिन्दा जगी सदैव नयी तिश्नगी रहे..
नाराजगी नहीं सहना आपकी मुझे
तेरे स्वभाव में सुख की सादगी रहे..
आभार आइना करिये नमन रोज़ ही
ख़ुशियाँ खिले सदा जगमग रोशनी रहे.
