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Kumar Ritu Raj

Abstract


4.0  

Kumar Ritu Raj

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जब -जब

जब -जब

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जब -जब मैं हारूं मन,

सूर्य दिल में किरण की आस दे तू।


जब -जब आँखों में आंसू हो,

बादल जल बरसा दे तू।


जब -जब दिल ये टूटे मेरे,

पंछी गीत सुना दे तू।


जब -जब कदम मेरे लड़खड़ाए,

धरती भूकंप ला दे तू।


जब -जब नेत्र मैं खोलू,

हे वृक्ष हरियाली दिखा दे तू।


जब - जब घमंड मुझ में आए तो,

हे पर्वत शीश दिखा दे तू।


जब - जब हैं चोटिल हूं,

एक खुदा यह दर्द भुला दे तू।


जब -जब मैं गलती करूं,

अपने गले लगा ले तू।


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