जादूगर कौन ?
जादूगर कौन ?
संध्यांबर की दावत में
सूरज रंग परोस रहा
जितने रंग मिले जुले,
किसकी जादू है सृष्टि ?
सागर लहराकर कहते
बुल बुलों को दावत दो
मछली गण भी दुहराते
थोडा खीर हमें रख दो ।
सारी चिडियाँ लौट चली
पेडों के निज नीडों पर
शामिल कर दो प्रियता से
आज जरा हम थके हुए ।
होली जैसा त्योहार देख
सारंग जरा बेखटके से
न्योता न मिला था प्रियवर
हमें बिठा दो कतार में !
नदियों में नव तालाबों में
नभस्थली की फैलावट
झलक रहा था तारों का
आभामय मुस्कान जैसा
कितना अच्छा रंगोत्सव है
सारे जीव चराचर जुड़ते
नीलांबर के दृष्टिबंध का
अचल अटल जादूगर कौन !
