इश्क में पागल
इश्क में पागल
हम दीवाने जिनके हुस्न के हैं,
वह मुर्शिद मेरे सबसे निराले हैं ।।
उनसे ही हमारी साँसे हैं,
हम इस कदर उनके मतवाले हैं।।
मन अपना तो बड़ा ही चंचल है,
फिर भी दिल और जाँ उनके हवाले है।।
हर शै में उनका जलवा है,
मेरे मुर्शिद बड़े ही दिलवाले हैं।।
दिल इस कदर पागल उनके इश्क में है ,
क्या बयां करुँ" नूरानी" सूरत वाले हैं।।
बन आशिक मस्त फिरता हूँ,
हर खुशी और ग़म के रखवाले हैं।।
मेरे दिलबर की क्या तारीफ करुँ,
" नीरज" फिदा इस कदर हुआ,
हम तो उनके चाहने वाले हैं।।
