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मिली साहा

Romance

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मिली साहा

Romance

इश्क़ में धड़कन चुराना

इश्क़ में धड़कन चुराना

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इश्क में धड़कन चुराना कोई तुमसे सीखे

लफ्जों से किसी को अपना बनाना कोई तुमसे सीखे

सदियाँ गुजार दूँ यूँ ही तुम जो सामने बैठे रहो

मोहब्बत तो कई करते हैं कोई इबादत करना तुमसे सीखे।


इंतजार क्या है इज़हार क्या है सब तुमसे ही जाना

तुमसे ही तो सीखा इन आँखों ने पलकों में ख़्वाब सजाना

मोहब्बत में मुलाकातें तो होती है अक्सर ही

पर हर मुलाकात में ज़िंदगी से मिलाना कोई तुमसे सीखे।


बस एक तन्हा सफ़र का मुसाफिर था मैं

जिसकी न कोई मंजिल थी और न था कोई ठिकाना

कहने को तो सभी कह देते जाने पहचाने हैं रास्ते

फर इन अजनबी राहों को अपना बनाना कोई तुमसे सीखे।


जीवन के हर क्षण में खुशी है तुमसे मिलकर जाना

तुमसे ही हर लम्हे को सीखा मैंने गुनगुनाना

ख़्वाब तो कितने होते होंगे मुकम्मल इस जहाँ में

ज़िन्दगी के हर क्षण को मुकम्मल जीना कोई तुमसे सीखे।


ख़त्म होने को ही था जब मेरी ज़िंदगी का उजास

तेरी मोहब्बत का नूर पाकर ही हुआ मुझको ये एहसास

कि अँधेरों का वजूद ठहरता नहीं सदैव ही 

दर्द में भी आखिर खुशियों को ढूँढ लाना कोई तुमसे सीखे।


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