STORYMIRROR

NIKHITA DAKHORE

Drama

1  

NIKHITA DAKHORE

Drama

इश्क की आग

इश्क की आग

1 min
118

आजकल

कुछ इस कदर


बढ़ती जा रही

इश्क की आग


सोचूँ मैं कब से 

इतना भी ना


निकलता होगा

टिकिया का झाग।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama