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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Tragedy Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Tragedy Inspirational

"इस दीवाली"

"इस दीवाली"

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सबसे पहले मन का अंधकार हटाये

फिर बाहर कोई हम दीपक जलाये

इस दीवाली, मन की गरीबी हम हटाये

आस पड़ोस सबको हम गले लगाये


इस दीवाली, आपसी वैमनस्य मिटाये

मन से, अपने शत्रुता का भाव मिटाये

इस दीवाली बन्धुत्व भाव दीप जलाये

आओ इस दीवाली, भाईचारा बढ़ायें


एक दीया शहीदों के नाम भी जलाये

इस दीवाली, फौजी घर मिठाई ले जाये

इस दीवाली, कुछ नव संकल्प कर जाये

इस बार हम बच्चों संग फुलझड़ी जलाये


अपने बीते बचपन में फिर से चले जाये

आओ इस दीवाली, पटाखे, बम जलाये

गरीबों को हम, नव वस्त्र दान कर जाये

आओ इस दीवाली, अहंकार त्याग जाये


मां लक्ष्मी वहीं रहती, जहां धर्म रहता है

इस दीवाली, ईमानदारी से पैसा कमाये

लक्ष्मी को ईमानदारी का ही भोग चढ़ाये

मां लक्ष्मी को हम रिश्वत पैसों से बचाये।



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