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RAJENDRA SINGH PARMAR

Abstract Inspirational


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RAJENDRA SINGH PARMAR

Abstract Inspirational


इस बार का रक्षाबंधन

इस बार का रक्षाबंधन

1 min 20 1 min 20

जीवन के बाल्य छोर से

जब नहीं था को भास

तब से मुझ को था

ये त्यौहार बहुत खास


इन नन्हे हाथो को

जब नहीं था इस धागे का मोल

तब मुझ को लगता था

ये स्नेह बंधन अनमोल


यधपि भाई बहन का प्रेम

एक है पावन अनुभूति

परन्तु राखी करती है

इस भावना की अभिव्यक्ति


हर वर्ष मैं तुम्हे

बांधती हूँ ये अनुराग

भैया इस बार मिल नहीं पाया

मुझे को ये सौभाग्य


ईश्वर से कामना करती हूँ

जीवन में आपके रहे हमेशा

हर्ष वैभव का संधि बंधन

मेरे इस प्यार को अपनी कलाई

पर बांध कर मनाना रक्षाबंधन।                


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