STORYMIRROR

इन्तज़ार

इन्तज़ार

1 min
745


पौ फटते ही

उठ जाती हैं स्त्रियाँ

बुहारती हैं झाड़ू

और फिर पानी के

बर्तनों की खनकती

हैं आवाज़ें


पायल की झंकार और

चूड़ियों की खनक से

गूँज जाता है गली-मुहल्ले

का नुक्कड़

जहाँ करती हैं स्त्रियाँ

इंतज़ार कतारबद्ध हो

पानी के आने का।


होती हैं चिंता पति के

ऑफ़िस जाने की और

बच्चों के लंच बाक्स

तैयार करने की,


देखते ही देखते

हो जाती है दोपहर

अब स्त्री को इंतज़ार

होता है बच्चों के

स्कूल से लौटने का


और फिर धीरे-धीरे

ढल जाती है शाम भी

उसके माथे की बिंदी

अब चमकने लगती है

पति के इंतज़ार में


और फिर होता

उसे पौ फटने का

अगला इंतज़ार!!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational