कुशाग्र जैन
Romance
उसका आना
बसन्त का अहसास देता है।।
मैं
इंतजार करता हूँ
उसके आने का
बसन्त से बसन्त तक।
वीर पुत्र
रंगीन स्वप्न ...
इंतजार
वसन्त
धूप
उम्मीद
कभी मेरे दिल ने कहा न हो, ऐसा कुछ अब होने लगा, तुम्हारे होते हुए भी, कभी मेरे दिल ने कहा न हो, ऐसा कुछ अब होने लगा, तुम्हारे होते हुए भी,
तू जलती हुई क्या इस रेत पर चलती ही रहती है ये क़िस्मत क्यों तुझे मख़मल के बिछौने नहीं देती तू जलती हुई क्या इस रेत पर चलती ही रहती है ये क़िस्मत क्यों तुझे मख़मल के बिछौने ...
हास- विलास प्रवीण रति क्रीड़ा व्याकुल उन्मादी रमणी सी! हास- विलास प्रवीण रति क्रीड़ा व्याकुल उन्मादी रमणी सी!
जैसे एक प्रभात मिल गया मेरी पतझड़ सी जिंदगी में जैसे वो बसंत की बहार था जैसे एक प्रभात मिल गया मेरी पतझड़ सी जिंदगी में जैसे वो बसंत की बहार था
फासला शायद ये तुमको याद हो आ गए तुमको ज़रा ढूंढते हुए। फासला शायद ये तुमको याद हो आ गए तुमको ज़रा ढूंढते हुए।
सुरभित प्रसून पराग गमक किसलय पाटल प्रभात सी! सुरभित प्रसून पराग गमक किसलय पाटल प्रभात सी!
कभी मगरूर हो हम कहते, तुम्हारी हर अदा अपनी, कभी मगरूर हो हम कहते, तुम्हारी हर अदा अपनी,
यह आसमान से जमीन पर उतर रहा एक प्यार का सागर है यह प्रेम का आगमन है यह आसमान से जमीन पर उतर रहा एक प्यार का सागर है यह प्रेम का आगमन है
गुलशन में बहार खिलकर आई ऐसे गुलमोहर की सिंदूरी छाँव बिछी जैसे गुलशन में बहार खिलकर आई ऐसे गुलमोहर की सिंदूरी छाँव बिछी जैसे
ये प्यार, मोहब्बत, दिल की लगी, क्या बला थी हमने ना जाना। ये प्यार, मोहब्बत, दिल की लगी, क्या बला थी हमने ना जाना।
तुझे ज़माने की नज़र से मैंने छुपाया है दहलीज़ पर खड़ी सुहानी शाम चाहिए। तुझे ज़माने की नज़र से मैंने छुपाया है दहलीज़ पर खड़ी सुहानी शाम चाहिए।
प्यार पर बस तो नहीं किसी का लेकिन फिर भी ख़ुद तबस्सुम से वो अपने जगा कुछ भी नहीं। प्यार पर बस तो नहीं किसी का लेकिन फिर भी ख़ुद तबस्सुम से वो अपने जगा कुछ भी नह...
भीग चुके हैं चाहे हम भी सर से पांव तक उनकी मुहब्बत में भीग चुके हैं चाहे हम भी सर से पांव तक उनकी मुहब्बत में
आबाद कर दोगे दिल के गुलशन, उसकी महक से तब एक पुराने पौधे को, तुम पतझड़ के नाम करोगे आबाद कर दोगे दिल के गुलशन, उसकी महक से तब एक पुराने पौधे को, तुम पतझड़ के नाम...
कुछ कह रहा मस्ती भरा फसाना। द्वार आने को हैं मेरे सजना। कुछ कह रहा मस्ती भरा फसाना। द्वार आने को हैं मेरे सजना।
मैं देवालय की देहरी का दीपक , तुम मन्दिर की देवी के सम हो। मैं देवालय की देहरी का दीपक , तुम मन्दिर की देवी के सम हो।
कहीं दूर खोया रहता है कोई अनजान उसके ही ख्यालों में सुबह शाम कहीं दूर खोया रहता है कोई अनजान उसके ही ख्यालों में सुबह शाम
किस्मत की ही तो बात है तुम सा हमसफ़र जो हमने पाया किस्मत की ही तो बात है तुम सा हमसफ़र जो हमने पाया
इश्क़, वफ़ाएं, मोहब्बत ये पास नहीं उसके ऐसे थे प्यासे वो दरिया उन्हें दिखाया है। इश्क़, वफ़ाएं, मोहब्बत ये पास नहीं उसके ऐसे थे प्यासे वो दरिया उन्हें दिखाया है...
जैसे कि धमाके की आवाज, जो हुई है अभी मेरे पड़ौस में। जैसे कि धमाके की आवाज, जो हुई है अभी मेरे पड़ौस में।