Divya B c
Romance
क्या कोयी अन्जान है,
या तेरे मुस्कान है,
इन लबों को ढूंढकर
चली एक शहर में,
खो गये हम इन
ख्वाबों की गलियों में,
ये है तन्हाइयाँ और
कहीं लेह्राइया,
सुनो कि हम यहां है,
जहाँ जाए तेरा एहसास है,
क्यूंकि ये हमसफ़र है।
प्यार के रास्...
अंतरंग के शीश...
इंतजार
सोच 🌌🎹
जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना। जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना।
इश्क़ में तेरे हद से गुज़र जाऊँगी या या बिखर जाऊँगी या संवर जाऊँगी...! इश्क़ में तेरे हद से गुज़र जाऊँगी या या बिखर जाऊँगी या संवर जाऊँगी...!
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया ! दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया !
अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा। अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा।
ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चला जाएगा, ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चल...
याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर और आधा.. याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर ...
तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख दें। तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख ...
एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन। एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे। जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ जाओ। आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ ज...
प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में। प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में।
खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे ! खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे !
रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना। रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना।
इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन ! इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन !
अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई। अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई।
हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी। हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी।