Divya B c
Abstract
ज़िन्दगी के हर लफ्ज़ में,
सुनहरा ख्वाहिशों है
सोचते ही वक़्त निकलते हैं,
मन को कुछ तो कहने दे
सुबह की बूंदें पत्तियों में,
शाम की बुँदे बारिश में।
हम हैं कहाँ, कुछ न पता
बस चल रहे हैं आगे,
है वहाँ, नया जहान।
प्यार के रास्...
अंतरंग के शीश...
इंतजार
सोच 🌌🎹
न जाने कब फंदा से लटका देगा या जला देगा जागो जागो मेरी बहन जागो आंसू मत बहा। न जाने कब फंदा से लटका देगा या जला देगा जागो जागो मेरी बहन जागो आंसू मत बहा।
लहरों का उठना और गिरना मन तो खूब समझता है! लहरों का उठना और गिरना मन तो खूब समझता है!
जनक कुटुम्ब को लगें हैं जैसे कोई प्रिय सम्बन्धी आए। जनक कुटुम्ब को लगें हैं जैसे कोई प्रिय सम्बन्धी आए।
हे लघुमानव, नारे लगाएँगे तेरे लिए, मानवीयता की मूर्ति, तेरे के लिए। हे लघुमानव, नारे लगाएँगे तेरे लिए, मानवीयता की मूर्ति, तेरे के लिए।
जयमाला से तिलमिलाए कुछ राजा तैयार हुए करने को युद्ध परशुराम आए ,थे क्रोध में वो। जयमाला से तिलमिलाए कुछ राजा तैयार हुए करने को युद्ध परशुराम आए ,थे क्रोध म...
चाहे अपयश भी हो मेरा व्याकुल बहुत था उनका मन। चाहे अपयश भी हो मेरा व्याकुल बहुत था उनका मन।
जैसे हाथी शिशु से भी, डर का कोई खेल रचाता है, कारक बनकर कर्ता का, कारण से मेल कराता है जैसे हाथी शिशु से भी, डर का कोई खेल रचाता है, कारक बनकर कर्ता का, कारण से मेल...
उम्मीद की छोटी चुनर में चिंता सुराख करे जाती है! उम्मीद की छोटी चुनर में चिंता सुराख करे जाती है!
ख़ुश रहो आबाद रहो फूलों फलों नींद के आग़ोश में वौ हमेशा के लिये सो गई। ख़ुश रहो आबाद रहो फूलों फलों नींद के आग़ोश में वौ हमेशा के लिये सो गई।
देश की रक्षा करना, सैनिक की भाषा विजय होके शहीद होना यही उनकी परिभाषा। देश की रक्षा करना, सैनिक की भाषा विजय होके शहीद होना यही उनकी परिभाषा।
कोई भी ना टूटे ऐसे हालातों से ऐसा कुछ जीवन में पुण्य कमाते हैं। कोई भी ना टूटे ऐसे हालातों से ऐसा कुछ जीवन में पुण्य कमाते हैं।
सुख दुख में भी साथ निभाती हो। फिर भी अपनी पहचान छुपाती हो। सुख दुख में भी साथ निभाती हो। फिर भी अपनी पहचान छुपाती हो।
ये वादा है भगवान का, वैसा ही जीवन पाओगे। ये वादा है भगवान का, वैसा ही जीवन पाओगे।
मैंने शाम की सच्चाइयों को देखा है, उसे निर्दयी होते, मरती परछाइयों को देखा है मैंने शाम की सच्चाइयों को देखा है, उसे निर्दयी होते, मरती परछाइयों को देखा है
माना तूने विज्ञान बनाया, मेरे हर वार को असफल ठहराया। माना तूने विज्ञान बनाया, मेरे हर वार को असफल ठहराया।
गर जो मर गए तो अपनी भूल भी नहीं सुधार पाओगे। गर जो मर गए तो अपनी भूल भी नहीं सुधार पाओगे।
बेरंग पड़ गए है बटन तह की निशानियाँ जमी है धूप लगेगी इसे इस साल भी! बेरंग पड़ गए है बटन तह की निशानियाँ जमी है धूप लगेगी इसे इस साल भी!
क्षीण तन मन दुर्बल, अब काँटा बन चुका शरीर। चली जा रही हो वह ऐसे, चली हों लहरें जिसके क्षीण तन मन दुर्बल, अब काँटा बन चुका शरीर। चली जा रही हो वह ऐसे, चली हो...
सबसे मीठी है बोली हमारी, जो हिन्दी कहलाती है! सबसे मीठी है बोली हमारी, जो हिन्दी कहलाती है!
एक जंगल जो फूलों से भरा हो तितलियाँ हों जिसमें हों जुगनू बेशुमार ! एक जंगल जो फूलों से भरा हो तितलियाँ हों जिसमें हों जुगनू बेशुमार !