इंसानियत इबादत रब की
इंसानियत इबादत रब की
आओ गीत प्यार के गायें, धरती को स्वर्ग बनाएं
जात पात के झगड़े छोड़ें, इंसानियत को मजहब बनाएं ।।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई प्रेम में सब बंध जाएं,
ईद, दीवाली, क्रिसमस, बैसाखी, मिल कर सभी मनाएं ।
हम सब एक ही ईश्वर के बन्दे, आपसी वैर विरोध मिटाएं,
आओ गीत प्यार के गायें, धरती को स्वर्ग बनाएं,
जात पात के झगड़े छोड़ें, इंसानियत को मजहब बनाएं ।।
बुज़ुर्गों का सम्मान करें, कभी उनका दिल न दुखाएं,
नारी का मान बढ़े इस जग में, शान से वो रह पाएं।
कोई निर्धन, लाचार, भूखा न रहे, मदद को हाथ बढ़ाएं,
आओ गीत प्यार के गायें, धरती को स्वर्ग बनाएं,
जात पात के झगड़े छोड़ें, इंसानियत को मजहब बनाएं ।।
मदरसा हो या गिरजा घर, इंसानियत का सबक पढ़ाएं,
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सब प्यार का संदेश फैलाएं ।
इंसानियत है रब की इबादत, मन में ये भाव जगाएं,
आओ गीत प्यार के गायें, धरती को स्वर्ग बनाएं,
जात पात के झगड़े छोड़ें, इंसानियत को मजहब बनाएं ।।
अंधकार को त्यागें इस मन से, ज्ञान का दीप जलाएं,
अज्ञानता, संकीर्णता छोड़, शिक्षा की अलख जगाएं ।
प्रगति के पथ पर हो देश हमारा, सपना हर आंख में आये,
विजय विश्व तिरंगा प्यारा, जग में ऊंचा लहराये ।
आओ गीत प्यार के गायें, धरती को स्वर्ग बनाएं,
जात पात के झगड़े छोड़ें, इंसानियत को मजहब बनाएं ।।
