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Ms. Santosh Singh

Tragedy

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Ms. Santosh Singh

Tragedy

इंसान

इंसान

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कैसा है ये जहाँ का मेला, 

जहाँ नफरत ही पनप रहा है।


चंद रुपयों की खातिर, 

 इंसान बिक रहा है।


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