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Jahanvi Tiwari

Abstract Tragedy

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Jahanvi Tiwari

Abstract Tragedy

इंसान फिर किधर जाएगा।।

इंसान फिर किधर जाएगा।।

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 वक्त मुश्किल भरा है  

हर बुरे वक्त की तरह,

यह वक्त भी गुजर जाएगा।


मंजिल बहुत दूर है, अनजाने हैं रास्ते

हर तरफ है हाहाकार ,

यह व्याकुल मन भला किधर जाएगा ?


यहां जिंदगी ही नहीं,

मौत के भी सौदे होते हैं,

वहशियों के बीच कोई लेकर,

अपना ईमान किधर जाएगा ?


दोषारोपण करके या कमियां निकाल के ,

जिम्मेदारियों से पीछे जो भाग रहे,

उन सबके बीच बदलाव की कोशिश करने वाला

इंसान फिर किधर जाएगा ?


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