इन वादियों से
इन वादियों से
इन वादियों, इन फिज़ाओ से निखरना है सीखना,
इन कलियों से फूलों में बिखरना है सीखना,
मैं थककर, बदन को फैलाऊँ, उस से पहले,
इन पंछियों से डालों पर चहकना है सीखना,
इन गिलहरियों से शाखाओं पर थिरकना है सीखना।
मैं सीख जाऊँ वो सब कुछ जो बागों है मेरी,
मैं बन जाऊँ वैसा ही जो ख़्वाबों में है तेरी,
इन भौरों से कह दो मेरे पास तो आयें,
मुझे उन-सा ही, ख़ुशबुओं में बहकाना है सीखना,
मुझे उन-सा ही, फूलों को महकाना है सीखना।
यह पल भर की ख़ुशियाँ नहीं, यह सदियों का सफर है,
यह फूलों, यह पौधों, यह पंछियों का हमसफर है,
इन्हें कल भी रहना है, हमारे बाद भी ऐसे,
फिर आज से ही इसको सँवारना है सीखना,
इन वादियों, इन बागियों को निखारना है सीखना।
