इक रंग प्यार का
इक रंग प्यार का
इक रंग प्यार का.....
तेरी सुरमई सी आँखों का
जो याद में मेरी अक्सर
घुल घुल सा जाता था।
इक रंग प्यार का.....
तेरी बिंदिया की लाली का
जो रोज़ उतर तेरे माथे से
मेरे काँधे पे नज़र आता था।
इक रंग प्यार का.....
तेरी मांग का वो सिंदूरी
जो सीने पे मेरे अक्सर
छाप छोड़ जाता था।
इक रंग प्यार का.....
टेसू से तेरे गालों का
जो देख मुझे लज्जा से
रक्ताभ सा हो जाता था।
इक रंग प्यार का.....
तेरे हाँथों की मेहंदी का
जो मेरे नाम से रच कर
गहरा हो जाता था।
इक रंग प्यार का.....
गुलकन्द सा तेरे अधरों का
जो नाम मेरा लेने पे
लरज लरज जाते थे।
इक रंग प्यार का.....
तेरे कुमकुम से रंगे पैरों का
जो मन के मेरे आँगन में
जो छाप छोड़ जाते थे।
और.....
एक महक तेरी चम्पई सी,
जो बिखर बिखर जाती है
तेरे बिन मेरी रातों में।
महका देती है तन मन
घुल के मेरी साँसों में।

