STORYMIRROR

sargam Bhatt

Abstract

3  

sargam Bhatt

Abstract

ईश्वर

ईश्वर

1 min
235

रब को देखो जोड़ी बनाए जा रहे हैं,

जो बनें हैं उनको मिलाए जा रहे हैं।


जिस को छोड़ दिया गया काली कलूटी कहकर,

उसको भी गुणों से सजाए जा रहे हैं।


जो कमजोर बन गई हैं अपने आप से,

उनके लिए वक्त सा जवाब बनाए जा रहे हैं। 


जो दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है,

उनके लिए हिसाब बनाए जा रहे हैं।


जो बच्चे अनाथ हैं उनका कोई नहीं

उनके लिए बांझ बनाए जा रहे हैं।


उन बांझो की गोद भरने के लिए,

लावारिस बच्चों को जन्माए जा रहे हैं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract