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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"ईडी"

"ईडी"

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एक ओर पड़ रही है,कड़ाके की ठंड

दूसरी तरफ ईडी का यह भय,प्रचंड

जो भी भ्रष्टाचार से रखते है,सम्बन्ध

ईडी दिखा रहा है,उनको कानूनी दंड

जो भी लोग बना रहे है,काला पैसा

ईडी उन्हें सबक सीखा रहा है,ऐसा

जैसे को मिल रहा है,जवाब तैसा

सर्दी मे छूटा उन्हें,पसीने का रेशा

जिन्होंने खाया,पैसा समझ मूल-कंद

ईडी उन भ्रष्टाचारियों पर डाल रहा,फंद

वो भूल गये,खुद के ही लिखे हुए निबंध

ईडी ने भूला दिया उनको अपना,घमंड

जो समझते थे,भारतीय कानून को अंध

ईडी ने उन्हें सूंघा दी,हवालात की सुगंध

जो पैसा चाहे कमाते है,जिंदगी भर मंद

पर जो लोग ईमानदारी से रखते है,संबंध

वो लोग ख्याति कमाते है,बहुत ही प्रचंड

वो तो इस कड़वी दुनिया में बनते गुलकंद

यकीन नही हो तो देख लो,श्री नरेंद्र मोदी

जिनसे आती है,एक चन्दन जैसी सुगन्ध


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